कौंदकेरा में बिजली की आंख-मिचौली से हाहाकार: बिना आंधी-पानी के अघोषित कटौती, 'सुशासन' के दावों की खुली पोल
Friday, May 22, 2026
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कौंदकेरा। क्षेत्र में इन दिनों बिजली की अघोषित और बार-बार होने वाली कटौती ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली की लगातार आंख-मिचौली से स्थानीय जनता त्रस्त और हलाकान है। हैरत की बात यह है कि बिना किसी आंधी, तूफान या बरसात के ही दिन में दर्जनों बार बिजली गुल हो रही है। सरकार जहां एक तरफ 'सुशासन' और निर्बाध बिजली आपूर्ति का ढोल पीट रही है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि कौंदकेरा के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
घोषणाएं हवा-हवाई, जनता त्रस्त
चुनावी मंचों से बड़े-बड़े वादे करने वाले स्थानीय राजनेता और सरकार अब इस गंभीर समस्या पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सुशासन का नारा देने वाली सरकार के राज में जनता को 24 घंटे बिजली तो दूर, न्यूनतम आवश्यक आपूर्ति भी नसीब नहीं हो रही है। नेताओं को जनता की सुध सिर्फ चुनाव के वक्त आती है, और जीत दर्ज करने के बाद वे जनता को उनकी मूलभूत समस्याओं के साथ बेसहारा छोड़ देते हैं।
बिजली विभाग के अभियंताओं की लापरवाही चरम पर
इस पूरी अव्यवस्था के लिए बिजली विभाग के जिम्मेदार अभियंता (इंजीनियर्स) सीधे तौर पर कटघरे में हैं। विभाग के पास न तो मेंटेनेंस का कोई ठोस प्लान है और न ही ट्रिपिंग की समस्या को ठीक करने की कोई इच्छाशक्ति। जब भी ग्रामीण सब-स्टेशन या जिम्मेदार अधिकारियों को फोन लगाते हैं, तो या तो उनका फोन नहीं उठता या फिर गोल-मोल जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। बिना किसी प्राकृतिक व्यवधान के बार-बार पावर कट होना विभाग की तकनीकी नाकामी और घोर लापरवाही को उजागर करता है।
व्यवसाय ठप, छात्र और बुजुर्ग परेशान
बिजली की इस बदहाली के कारण कौंदकेरा का स्थानीय व्यापार पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। छोटे से बड़े व्यवसायी संचालक खाली बैठने को मजबूर हैं। इसके साथ ही, भीषण गर्मी और उमस के कारण घर में मौजूद बुजुर्गों, मरीजों और छोटे बच्चों का जीना मुहाल हो गया है। स्कूली और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो चुकी है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
कौंदकेरा के आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली विभाग के अभियंताओं ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और सरकार ने अघोषित कटौती पर तुरंत रोक नहीं लगाई, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे जल्द ही बिजली दफ्तर का घेराव करेंगे और चक्काजाम कर सोए हुए प्रशासन को जगाने का काम करेंगे।
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