कौंदकेरा में हाहाकार: बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग, अघोषित बिजली कटौती से रातें काली, जनता में फूटा भाजपा सरकार और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश अंधेर नगरी-चौपट राजा: बिना आंधी-तूफान के घंटों गुल रहती है बत्ती, शिकायत करने पर जिम्मेदार अफसर बंद कर लेते हैं मोबाइल बन्द
Friday, June 19, 2026
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कौंदकेरा-राजिम / विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच कौंदकेरा के ग्रामीण आज के दौर में भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गांव में बिजली और पानी का संकट इस कदर गहरा गया है कि लोगों का जीना दूभर हो चुका है। एक तरफ जहां अत्यधिक बोरवेल खनन और रबी फसल के अंधाधुंध दोहन से जलस्तर पाताल में चला गया है, वहीं दूसरी तरफ बिजली विभाग की मनमानी ने ग्रामीणों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। बदहाल व्यवस्था से त्रस्त जनता अब सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन, बिजली विभाग और प्रदेश की भाजपा सरकार को कोस रही है।
पाताल में गया जलस्तर, गंदा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण
ग्रामीणों के मुताबिक, इलाके में रबी फसल के लिए हुए अत्यधिक बोरवेल खनन के कारण भूजल स्तर (Water Level) तेजी से गिरा है। पीने के पानी के मुख्य स्रोत सूख चुके हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए मजबूरी में दूषित और गंदा पानी पीना पड़ रहा है। पानी की इस किल्लत से गांव में बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है, लेकिन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) मूकदर्शक बना बैठा है।
बिजली विभाग की खुली गुंडागर्दी: बिना हवा-तूफान के दर्जनों बार कटौती
पानी के संकट को बिजली की अघोषित कटौती ने कई गुना बढ़ा दिया है। मौसम साफ रहने के बावजूद, बिना किसी आंधी-तूफान के रात में दर्जनों बार बिजली गुल कर दी जाती है। घंटों तक पूरा गांव अंधेरे के आगोश में डूबा रहता है। उमस और गर्मी के इस मौसम में बच्चे, बुजुर्ग और मरीज तड़पने को मजबूर हैं।
अफसरों की 'कॉल फॉरवर्डिंग' राजनीति: न लाइनमैन की ड्यूटी, न साहब उठाते हैं फोन
बिजली विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि रात के समय ग्रिड या सब-स्टेशन पर किसी भी लाइनमैन या बिजली मिस्त्री की ड्यूटी नहीं लगाई जाती। यदि कोई फॉल्ट आ जाए, तो उसे सुधारने के लिए सुबह तक का इंतजार करना पड़ता है। जब परेशान ग्रामीण बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को फोन लगाते हैं, तो या तो उनका नंबर बंद मिलता है या फिर वे फोन उठाना जरूरी नहीं समझते।
मिलीभगत का आरोप: जनता की अदालत में कटघरे में भाजपा सरकार
इस पूरी अव्यवस्था से कौंदकेरा की जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों और सत्ताधारी दल के नेताओं के बीच गहरी मिलीभगत है, जिसके कारण विभाग पर कोई कार्रवाई नहीं होती। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाली भाजपा सरकार आज जनता को साफ पानी और निर्बाध बिजली देने में भी नाकाम साबित हो रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली कटौती बंद नहीं हुई और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।
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