सोता रहा PWD विभाग, पहली ही बारिश में डूबा राजिम क्षेत्र!कोपरा-पोखरा मार्ग पर निर्माणाधीन पुलिया बनी आफत; कई गांवों का संपर्क टूटा, सुध लेने नहीं पहुंचा कोई जिम्मेदार - thekhabarwala

सोता रहा PWD विभाग, पहली ही बारिश में डूबा राजिम क्षेत्र!कोपरा-पोखरा मार्ग पर निर्माणाधीन पुलिया बनी आफत; कई गांवों का संपर्क टूटा, सुध लेने नहीं पहुंचा कोई जिम्मेदार

राजिम। मानसून की पहली ही बारिश ने क्षेत्र में प्रशासन और ठेकेदार के विकास के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। कोपरा-पोखरा मार्ग पर समय रहते पुलिया का निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण पहली ही झमाझम बारिश लोगों के लिए बड़ी आफत बनकर टूटी है। निर्माण में हुई घोर लापरवाही की वजह से पूरा इलाका जलमग्न हो चुका है और मुख्य मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है।

अधूरे निर्माण ने बढ़ाई मुसीबत, कई गांवों का संपर्क टूटा
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस पुलिया का निर्माण कार्य लंबे समय से कछुआ गति से चल रहा था। नियमानुसार बारिश का मौसम शुरू होने से पहले इस कार्य को पूरा किया जाना था। लेकिन ठेकेदार की सुस्ती और अफसरों की अनदेखी का खामियाजा अब हजारों ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। पहली ही बारिश के बाद निर्माणाधीन पुलिया के आसपास का बड़ा हिस्सा नदी-नाले में तब्दील हो गया है। इस मार्ग से जुड़े आसपास के कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय और अन्य प्रमुख कस्बों से पूरी तरह कट गया है, जिससे आपातकालीन स्थितियों में भी लोगों का निकलना दूभर हो गया है।
आवागमन ठप, वैकल्पिक रास्ता न होने से राहगीर परेशान
सड़क पर पानी का तेज बहाव होने और भारी कीचड़ के कारण दोपहिया और चार पहिया वाहनों का निकलना नामुमकिन हो गया है। कई राहगीर और आवश्यक सेवाओं वाले वाहन बीच रास्ते में ही फंस गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार को बार-बार चेतावनी देने के बाद भी न तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए और न ही आवागमन के लिए कोई मजबूत वैकल्पिक रास्ता (डाइवर्जन रोड) तैयार किया गया।
अधिकारियों की संवेदनहीनता: सुध लेने नहीं पहुंचा PWD का कोई जिम्मेदार
इस बड़ी आपदा ने आपदा प्रबंधन के सरकारी दावों की पोल खोल दी है। सबसे ज्यादा आक्रोश इस बात को लेकर है कि मार्ग बंद होने और कई गांवों का संपर्क टूटने के बावजूद लोक निर्माण विभाग (PWD) का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी स्थिति का जायजा लेने मौके पर नहीं पहुंचा है। दफ्तरों में बैठे अफसरों की इस संवेदनहीनता से ग्रामीणों में भारी गुस्सा है। वर्तमान में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। ग्रामीण अब इस मामले में उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप, जल्द से जल्द वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की मांग कर रहे है।
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