कौंदकेरा में लापरवाही की पराकाष्ठा: ग्रामीणों की सुगबुगाहट और आक्रोश के बाद पंचायत ने सड़क से हटाया मलबा, राहगीरों को मिली राहत! लेकिन पंचायत के कार्यप्रणाली पर अब भी उठता सवाल ?
Monday, July 20, 2026
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राजिम- कौंदकेरा (राजिम सड़क मार्ग): स्थानीय ग्राम पंचायत की घोर लापरवाही के खिलाफ ग्रामीणों की सुगबुगाहट और बढ़ते आक्रोश का बड़ा असर देखने को मिला है। भरे मानसून में नाली सफाई के बाद आधी मुख्य सड़क पर फैलाया गया कीचड़ और मलबा, जो राहगीरों के लिए काल बना हुआ था, उसे पंचायत प्रशासन द्वारा आखिरकार हटा दिया गया है।
गर्मी में सोती रही पंचायत, अब बारिश में जागी नींद
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश था कि जब भरी गर्मी के दिनों में गांव के तालाब सूख रहे थे और निस्तारी (रोजमर्रा के उपयोग) के लिए तालाबों में पानी भरना बेहद जरूरी था, तब पंचायत सो रही थी और नाली की सफाई नहीं कराई गई। उस समय नाली साफ होती तो तालाब पानी से भर जाते। लेकिन कुछ रसूखदार किसानों के कथित दबाव में आकर पंचायत ने उस समय काम रोक दिया और अब भरे मानसून में नाली की खुदाई कराकर आधी सड़क को दलदल में तब्दील कर दिया था। [1]
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश था कि जब भरी गर्मी के दिनों में गांव के तालाब सूख रहे थे और निस्तारी (रोजमर्रा के उपयोग) के लिए तालाबों में पानी भरना बेहद जरूरी था, तब पंचायत सो रही थी और नाली की सफाई नहीं कराई गई। उस समय नाली साफ होती तो तालाब पानी से भर जाते। लेकिन कुछ रसूखदार किसानों के कथित दबाव में आकर पंचायत ने उस समय काम रोक दिया और अब भरे मानसून में नाली की खुदाई कराकर आधी सड़क को दलदल में तब्दील कर दिया था। [1]
ग्रामीणों की सुगबुगाहट के बाद हटा कीचड़
इस व्यस्त राजिम मार्ग पर लगातार फिसलते वाहनों और हादसों के बढ़ते खतरे को देखते हुए ग्रामीणों के बीच भारी सुगबुगाहट और विरोध शुरू हो गया। चौतरफा दबाव और जनता के फूटे गुस्से के बाद आखिरकार पंचायत प्रशासन की नींद टूटी और सड़क पर जमा मलबे को तुरंत साफ कराया गया।
इस व्यस्त राजिम मार्ग पर लगातार फिसलते वाहनों और हादसों के बढ़ते खतरे को देखते हुए ग्रामीणों के बीच भारी सुगबुगाहट और विरोध शुरू हो गया। चौतरफा दबाव और जनता के फूटे गुस्से के बाद आखिरकार पंचायत प्रशासन की नींद टूटी और सड़क पर जमा मलबे को तुरंत साफ कराया गया।
सड़क साफ, लेकिन सवाल बरकरार
मलबा हटने से इस मार्ग से गुजरने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों ने बड़ी राहत की सांस ली है और अब दुर्घटना का खतरा टल गया है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि भले ही मलबा हटा दिया गया हो, लेकिन गर्मी में निस्तारी के पानी के लिए जनता को तरसाने वाले और अब ऐसा गैर-जिम्मेदाराना फैसला लेने वाले जिम्मेदार पंचायत, सरपंच, जनप्रतिनिधियों के कार्यप्रणाली पर अब भी उठता है सवाल ?
मलबा हटने से इस मार्ग से गुजरने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों ने बड़ी राहत की सांस ली है और अब दुर्घटना का खतरा टल गया है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि भले ही मलबा हटा दिया गया हो, लेकिन गर्मी में निस्तारी के पानी के लिए जनता को तरसाने वाले और अब ऐसा गैर-जिम्मेदाराना फैसला लेने वाले जिम्मेदार पंचायत, सरपंच, जनप्रतिनिधियों के कार्यप्रणाली पर अब भी उठता है सवाल ?
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